(कर्म को प्रधान रूप से कहने के लिए कर्मवाच्य का प्रयोग होता है। कर्मवाच्य में कर्ता में तृतीया, कर्म में प्रथमा …
(निमित्त, हेतु, सम्प्रदान आदि के वाचक शब्दों में चतुर्थी के स्थान में सप्तमी का प्रयोग भी देखा जाता है।) समित्सु…
(सति- सप्तमी:- जिस क्रिया से अन्य क्रिया बताई जा रही हो, तब उस पूर्ववाली क्रिया में तथा उस क्रिया के कर्ता व कर्…
(अभिव्यापक आधार- ऐसा आधार जिसके साथ आधेय का व्याप्य-व्यापक सम्बन्ध हो, उसको अभिव्यापक आधार कहते हैं।) गुडे माधुर…
(वैषयिक आधार:- विषयता सम्बन्ध से जब किसी को आधार माना जाता है, तब वह वैषयिक आधार कहाता है।) मुमुक्षोः मोक्षे इच्…
(कर्त्ता व कर्म के आधार को अधिकरण कहते हैं। अधिकरण कारक में सप्तमी विभक्ति होती है। व्याख्याकारों ने आधार तीन प्…
(क्रिया को बार-बार करने के होनेवाले कृत्वसुच्, सुच् तथा धा प्रत्ययवाले शब्दों के साथ कालाधिकरण कारक में षष्ठी व…
(कृत् संज्ञक प्रत्यय के प्रयोग में कर्त्ता व कर्म में षष्ठी विभक्ति का प्रयोग होता है जब वाक्य में कर्त्ता व कर्…
(कर्त्तादि कारकों को कहने की इच्छा न हो तब उन कारकों में षष्ठी विभक्ति का प्रयोग होता है।) सीता अशोकवाटिकायामुपव…
(बहुतों में एक को छांटने में जिसमें से छांटा जाए उसमें षष्ठी तथा सप्तमी दोनों का प्रयोग देखा जाता है।) व्याकरणअध…
स्तुति:
सामाजिकम्